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कलम से: मधुबनी के राजद नेता सह झंझारपुर लोकसभा पूर्व प्रत्याशी बिपिन कुमार सिंघवैत जी BhoomiNews पर लेख के माध्यम से अपने समाज को आँखें खोलने का प्रयास कर रहा हैं।


मुझे लगता हैं कि अपने देश में जो एक रूढ़िवादी अजगर पैर पसारे बैठा हैं उसे जल्द ख़त्म होना चाहिए। अपने देश में कब तक जाति धर्म एवं सामर्थ को देखकर न्याय मिलता रहेगा, "जब से जाति धर्म के अनुसार नहीं अपराध को ताकपर रख कर न्याय होना शुरू होगा तब जाके देश के जनता सुखी सम्पन होगा" - बिपिन कुमार सिंघवैत, राजद नेता


ये तथाकथित विशेष वर्ग के लोग अपराध और मौत को भी आम और खास बना डालते हैं। यह बातें ऐसे ही नहीं कही जा रही है। याद कीजिए हैदराबाद रेप कांड जिसे हर न्यूज चैनल पर प्रमुखता के साथ दिखाया गया जबतक दोषियों का एनकाउंटर नहीं हुआ और लड़की को कानून और संविधान को ताकपर रखकर न्याय नहीं मिला..... तबतक न्यूज चैनल और सोशल मीडिया पर यह न्यूज सनसनी खेज बना हुआ था। इस घटना के इर्द-गिर्द ही उन्नाव में दलित लड़की का 4 ब्राह्मणों ने मिलकर बलात्कार कर उस लड़की को जिंदा जला दिया, लड़की ने अस्पताल में तड़प-तड़प कर अपना दम तोड़ा दी, यह खबर ना तो मिडिया की सुर्खी बनी और ना ही सोशल मिडिया पर सनसनी खेज बन पायी। पता करें आपलोग की उक्त लड़की को अबतक न्याय मिल पाया है और क्या उन चार दरिंदों को फांसी पर लटकाया गया?



इन मनुवादीयों सामंतवादीयों की कारस्तानि(करतूत) तो देखो, पालघर की घटना पर इन लोगों के द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया जा रहा हैं कि मरने वाला साधू जूना अखाड़े का था, लाॅकडाउन ख़त्म होने दो महाराष्ट्र में तांडव होगा तांडव और कोई कह रहा है....... साधू को तुमने मार तो दिया अब परशुराम बनकर काटना शुरू करेंगे? मेरा कहना हैं कि परशुराम बनके मारोगे तो मरने वालों में से पाकिस्तानी होगा या हिंदुस्तानी, अरे मरने मारने की बात छोड़ो न्याय की बात करो। 



सबसे आश्चर्य की बात है कि ये मनुवादी और सामंतवादी लोग सोशल मीडिया पर अब भी हिंसात्मक बयान दे रहे हैं। इस मामले को हिन्दू मुस्लिम का रंग देने का भरसक प्रयास किया गया है। ये तो शुक्र है  कि घटना को अंजाम देने वाले हिन्दू थे घटना के दिन ही उद्धव सरकार ने कड़ी कारवाई करते हुए घटना को अंजाम देने वालों को गिरफ्तारी करवायी। इसके बावजूद RSS/Bjp के समर्थक सोशल मीडिया पर हिंसात्मक बयान देने से बाज नहीं आ रहा हैं......



दूसरी तरफ बेगुसराय में मनुवादी, सामंतवादी, शासन प्रशासन के द्वारा विक्रम पोद्दार और संतोष शर्मा का डबल मर्डर कर दिया जाता हैं। अभी तक इस मामले में सरकार के तरफ से किसी भी तरह का कारवाई हुई है क्या? ये मामला अभी तक न्यूज चैनल पर राष्ट्रीय खबर क्यों नहीं बन पाया? 

मैं बहुजन समाज से निवेदन करता हूँ...... विक्रम पोद्दार और संतोष शर्मा के लिए पूरा समाज एक साथ आकर आवाज उठाओ, आपलोग अब आवाज नहीं उठाओगे तो कल पोद्दार और शर्मा के जगह हम और आप में से किसी और को इसी तरह मार देगा और किसी को कुछ फर्क नहीं पड़ेगा।

इन मनुवादीयों और सामंतवादीयों को न्याय तुरंत मिल जाता है, क्योंकि सरकार भी इनकी, मिडिया भी इनकी और न्यायपालिका भी इन्ही का....... आपका क्या आप बहुजनों में तो एकता भी नहीं है, तो न्याय मिलेगा कैसे........ आज पोद्दार मरा है तो पिछड़ा, दलित चुप.... कल कोई पिछड़ा दलित मरेगा तो अतिपिछरा चुप, ये अंग्रेज की वंशज यही तो चाहता है कि बहुजनों में कभी एकता ही न हो। 

विश्वास रखो जिस दिन बहुजनों के समग्र समाज में एकता हो जाएगी  और शिक्षा का संचार हो गया, जात-पात का आपसी द्वेष मिट जाएगा उस दिन ये मनुवादी सामंतवादी विचार धारा हिन्दुस्तान से भागने पर मजबूर हो जायेगा...............✍️बिपिन सिंघवैत के कलम से

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